समझ के परे है ‘नहाना’

ये नहाना भी अपनी समझ के परे है…..

जिस शब्द में ही आगे ‘न’  है

और

पीछे  ‘ना’ है….

तो बीच में ये दुनिया ‘हा’  कराने पर क्यों तुली है…..  ।

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