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भारत के 14वें राष्ट्रपति चुनाव , जाने आसान शब्दों में सम्पूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया

भारत के 14 वें राष्ट्रपति चुनाव का बिगुल बज चूका है और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का पांच साल का कार्यकाल 24 जुलाई, 2017 को खत्म हो रहा है. वहीं उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त, 2017 को खत्म होने वाला है.  उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के संसद करते हैं .

भारत के 14 वें राष्ट्रपति चुनाव

17 जुलाई को देश के अगले राष्ट्रपति के लिए मतदान होगा और 20 जुलाई को वोटों की गिनती होगी .

बता दें कि देश में राष्ट्रपति का चुनाव आम प्रक्रिया के तहत नहीं किया जाता, इसके लिए एक खास प्रक्रिया को अपनाया जाता है जिसे इलेक्‍ट्रॉल कालेज कहते हैं। इस प्रक्रिया में जनता सीधे अपने राष्ट्रपति का नहीं चुनती, बल्कि उसके द्वारा चुने गए विधायक और सांसद मिलकर राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं.

आइए जानत हैं कि क्या है भारत के राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया और कैसे चुना जाता है देश के राष्ट्रपति को .

राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

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भारत में राष्ट्रपति को संविधान का अंग माना जाता है इसलिए राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भी संवैधानिक तरीके से होती है.  भारत  के राष्ट्रपति चुनाव में देश की जनता प्रत्यक्ष रूप से सभागिता नहीं निभाती है मतलब देश के राष्ट्रपति के चुनाव में जनता मतदान नहीं करती है इसके लिए एक खास प्रक्रिया इलेक्‍ट्रॉल कालेज अपनाया जाता है.

अप्रत्यक्ष चुनाव 

राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज करता है. संविधान के अनुच्छेद 54 में इसका उल्लेख है. यानी जनता अपने राष्ट्रपति का चुनाव सीधे नहीं करती, बल्कि उसके मतदान से चुने गए लोग करते हैं. यह है अप्रत्यक्ष निर्वाचन.

कौन कर सकता है राष्ट्रपति चुनाव में मतदान

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इस चुनाव में सभी प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित  सदस्य और लोकसभा तथा राज्यसभा में चुनकर आए सांसद मतदान डालते हैं. राष्ट्रपति की ओर से संसद में नॉमिनेटेड सदस्य मतदान नहीं डाल सकते. राज्यों की विधान परिषदों के सदस्यों को भी वोटिंग का अधिकार नहीं है, क्योंकि वे जनता द्वारा चुने गए सदस्य नहीं होते.

सिंगल ट्रांसफरेबल मतदान

इस चुनाव में एक खास तरीके से वोटिंग होती है, जिसे सिंगल ट्रांसफरेबल मतदान सिस्टम कहते हैं. यानी मतदाता एक ही मतदान देता है, लेकिन वह तमाम उम्मीदवारों में से अपनी प्रायॉरिटी तय कर देता है. यानी वह बैलट पेपर पर बता देता है कि उसकी पहली पसंद कौन है और दूसरी, तीसरी कौन. यदि पहली पसंद वाले मतदानों से विजेता का फैसला नहीं हो सका, तो उम्मीदवारों के खाते में मतदाता की दूसरी पसंद को नए सिंगल मतदान की तरह ट्रांसफर किया जाता है. इसलिए इसे सिंगल ट्रांसफरेबल मतदान कहा जाता है.

आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था

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मतदान डालने वाले सांसदों और विधायकों के मतदान का वेटेज अलग-अलग होता है. दो राज्यों के विधायकों के मतदानों का वेटेज भी अलग होता है. यह वेटेज जिस तरह तय किया जाता है, उसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था कहते हैं.

विधायकों के मतदान का वेटेज

विधायक के मामले में जिस राज्य का विधायक हो, उसकी आबादी देखी जाती है. इसके साथ उस प्रदेश के विधानसभा सदस्यों की संख्या को भी ध्यान में रखा जाता है. वेटेज निकालने के लिए प्रदेश की जनसंख्या को निर्वाचित विधायकों की संख्या से विभाजित किया जाता है. इस तरह जो नंबर मिलता है, उसे फिर 1000 से विभाजित किया जाता है. अब जो आंकड़ा हाथ लगता है, वही उस राज्य के एक विधायक के मतदान का वेटेज होता है. 1000 से भाग देने पर अगर शेष 500 से ज्यादा हो तो वेटेज में 1 जोड़ दिया जाता है.

सांसदों के मतदान का वेटेज

सांसदों के मतों के वेटेज का गणित अलग है. सबसे पहले सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मतदानों का वेटेज जोड़ा जाता है. अब इस सामूहिक वेटेज को राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित  सदस्यों की कुल संख्या से विभाजित किया जाता है. इस तरह जो नंबर मिलता है, वह एक सांसद के मतदान का वेटेज होता है. अगर इस तरह भाग देने पर शेष 0.5 से ज्यादा बचता हो तो वेटेज में एक का इजाफा हो जाता है.

मतदानों की गिनती

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राष्ट्रपति के चुनाव में सबसे ज्यादा मतदान हासिल करने से ही जीत तय नहीं होती है. राष्ट्रपति वही बनता है, जो मतदाताओं यानी सांसदों और विधायकों के मतदानों के कुल वेटेज का आधा से ज्यादा हिस्सा हासिल करे. यानी इस चुनाव में पहले से तय होता है कि जीतने वाले को कितना मतदान यानी वेटेज पाना होगा.

वर्तमान पार्टियों के पास वोट बैंक 

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भारत के 14 वें राष्ट्रपति चुनाव में इस बार सत्तारूढ़ NDA की तरफ से राम नाथ किविन्द राष्ट्रपति पद के दावेदार हैं वहीँ विपक्ष और UPA की तरफ पूर्व लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार का नाम नामांकित किया गया है . इस समय राष्ट्रपति चुनाव के लिए जो इलेक्टोरल कॉलेज है, उसके सदस्यों के मतदानों का कुल वेटेज 10,98,882 है. तो जीत के लिए दावेदार को हासिल करने होंगे 5,49,442 मतदान.

वर्तमान में NDA के पास कुल 527,371 मतदान है उसे जीतने के लिए लगभग 23 ,000 मतदान की जरूरत है वहीँ UPA के पास 173,849 मतदान हैं . अब जो प्रत्याशी सबसे पहले यह कोटा हासिल करेगा , वह राष्ट्रपति चुन लिया जाता है. लेकिन सबसे पहले का मतलब क्या है ?

प्रायॉरिटी का महत्व

इस सबसे पहले का मतलब समझने के लिए मतदान काउंटिंग में प्रायॉरिटी पर गौर करना होगा. सांसद या विधायक मतदान देते वक्त अपने मतपत्र पर बता देते हैं कि उनकी पहली पसंद वाला दावेदार कौन है, दूसरी पसंद वाला कौन और तीसरी पसंद वाला कौन आदि आदि. सबसे पहले सभी मतपत्रों पर दर्ज पहली वरीयता के मत गिने जाते हैं. यदि इस पहली गिनती में ही कोई दावेदार जीत के लिए जरूरी वेटेज का कोटा हासिल कर ले, तो उसकी जीत हो गई. लेकिन अगर ऐसा न हो सका, तो फिर एक और कदम उठाया जाता है.

उम्मीदवारों की छटनी

पहले उस उम्मीदवार  को रेस से बाहर किया जाता है, जिसे पहली गिनती में सबसे कम मतदान मिले. लेकिन उसको मिले मतदानों में से यह देखा जाता है कि उनकी दूसरी पसंद के कितने मतदान किस उम्मीदवारों को मिले हैं. फिर सिर्फ दूसरी पसंद के ये मतदान बचे हुए उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं.

यदि ये मतदान मिल जाने से किसी उम्मीदवारों के कुल मतदान तय संख्या तक पहुंच गए तो वह उम्मीदवारों विजयी माना जाएगा. अन्यथा दूसरे दौर में सबसे कम मतदान पाने वाला रेस से बाहर हो जाएगा और यह प्रक्रिया फिर से दोहराई जाएगी. इस तरह मतदाता का सिंगल मतदान ही ट्रांसफर होता है. यानी ऐसे वोटिंग सिस्टम में कोई मैजॉरिटी ग्रुप अपने दम पर जीत का फैसला नहीं कर सकता है. छोटे-छोटे दूसरे ग्रुप्स के मतदान निर्णायक साबित हो सकते हैं. यानी जरूरी नहीं कि लोकसभा और राज्यसभा में जिस पार्टी का बहुमत हो, उसी का दबदबा चले. विधायकों का मतदान भी अहम है.

विजेता की प्रक्रिया

सेकंड प्रायॉरिटी के मतदान ट्रांसफर होने के बाद सबसे कम मतदान वाले उम्मीदवार को बाहर करने की नौबत आने पर अगर दो उम्मीदवारों को सबसे कम मतदान मिले हों, तो बाहर उसे किया जाता है, जिसके फर्स्ट प्रायॉरिटी वाले मतदान कम हों. अगर अंत तक किसी प्रत्याशी को तय कोटा न मिले, तो भी इस प्रक्रिया में उम्मीदवार बारी-बारी से रेस से बाहर होते रहते हैं और आखिर में जो बचेगा, वही विजयी होगा.

 

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Rajdeep Raghuwanshi

नमस्ते , मैं एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूँ और मुझे एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और ह्यूमर पर लिखना पसंद है !

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