अब जीपीएस नहीं, यूरोप का गैलिलियो बताएगा सभी को रास्ता…..

तेजी से  बदलती दुनिया में नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है. बात चाहे समुद्र में तैरते विशाल जहाजों की हो या आकाश में उड़ते विमानों की, नेविगेशन सिस्टम के बिना उन्हें चलाना मुमकिन नहीं.आजकल तो सड़कों पर चलती गाड़ियों का काम भी नेविगेशन के बिना नहीं चलता.इसी बात को ध्यान में रखते हुए यूरोप ने भी अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम बना लिया है जिसका नाम गैलिलियो रखा गया है. जो अमेरिका के जीपीएस से कहीं ज्यादा तेज और सटीक है.
european satellite navigation system
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यूरोप अपने नेविगेशन सिस्टम गैलीलियो को अमेरिका के सिस्टम से भी बेहतर बनाना चाहता है. गैलीलियो की सैटेलाइट्स जीपीएस के मुकाबले कहीं ज्यादा ताकतवर सिग्नल और फ्रिक्वेंसीज भेजती हैं. इसकी वजह से दुनिया भर में कहीं भी लोकेशन की जानकारी और भी ज्यादा सटीक ढंग से मिल रही है.

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भविष्य में इस सेंटर से 18 और गैलीलियो सैटेलाइट्स कंट्रोल की जाएंगी. यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है, इसे पूरा करने के लिए दुनिया भर के 100 वैज्ञानिक और तकनीशियन मिलकर काम कर रहे हैं. आरबिंगर कहते हैं, “हमारा काम सैटेलाइट्स को सुरक्षित ढंग से उड़ाना है. सफल शुरूआत के बाद हम रुटीन वाला काम करते हैं और जरूरी नेविगेशन डाटा को इंपोर्ट करने लगते हैं.”

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शुरुआती तकनीकी समस्याओं के बाद 2011 में एक रूसी रॉकेट के जरिये गैलीलियो के फर्स्ट फेज के उपग्रह भेजे गए. पृथ्वी से लगभग 23 हजार किलोमीटर ऊपर पहुंचने के बाद उपग्रह निर्धारित कक्षा में स्थापित हुए. उपग्रह इस तरह स्थापित किये गए हैं कि वे धरती के एक एक सेंटीमीटर को कवर कर सकें. 2020 तक कुल 30 गैलीलियो सैटेलाइट्स भेजी जाएंगी. इनकी मदद से पृथ्वी पर कहीं भी मुफ्त नेविगेशन संभव होगा.

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इस पूरे अभियान पर खर्च करीब पांच अरब यूरो आएगा. अंतरिक्ष में लगी गैलीलियो आंखें भविष्य में इंसान को बेहतरीन नेविगेशन की सुविधा करायेंगी.

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