फूलों का रस बनेगा, घायल सैनिको के उपचार की दवा

फूलों के रस से घायल सैनिको का उपचार

आयुर्वेद की काबिलियत से हम सभी वाकिफ हैं. आयुर्वेद ने कई मुश्किल चीजों को सफल करके बताया है. अब इसी आयुर्वेद की मदद से युद्ध में घायल सैनिको का उपचार सम्भव हो सकेगा.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जयप्रकाश नारायण अपेक्स ट्रॉमा सेंटर (जेपीएनए) में फूलों के रस से घायल जवानों के घाव भरने को लेकर प्रयोग किये जायेंगे. फूलों के रस से ऐसी दवाई का निर्माण किया जायेगा जो युद्ध में घायल सैनिको का इलाज करने में कारगर साबित हो सके.

एम्स और डीआरडीओ ने मिलकर एक प्रोजेक्ट तैयार किया है जिससे इन हर्बल उपचारों पर प्रयोग किये जायेंगे. इसके अलावा रक्त को बहने से रोकने के लिए विशेष तरह के स्पंज और सैनिको के फेफड़ों से ऑक्सीजन को स्त्रावित होने से रोकने के लिए विशेष सुई पर भी प्रयोग किये जायेंगे.

फूलों के रस से घायल सैनिको का उपचार

इस प्रोजेक्ट में डीआरडीओ के 15 वैज्ञानिक और एम्स के 15 डॉक्टर शामिल होंगे और इन दवाओं के लिए प्रयोग करेंगे.

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इस तरह के प्राकतिक उत्पाद विशेष तरह जैसे जलने के उपचार में सहायक होते हैं. जब आग से जलते हैं तो त्वचा शरीर की मांसपेशियों से चिपक जाती है जिससे सर्जरी करने में समस्या आती है. फूलों का यह रस सर्जरी से बचने का आसन तरीका है.

फूलों से बनने वाली दवाइयों के लिए पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से मंजूरी ली जाएगी.

फूल पहले से ही घरेलु उपचारों में शामिल हैं
कमल : कब्ज उपचार, आँखों की रोशनी
केवड़ा : श्वास संबंधी विकार, सिरदर्द और गठिया रोग
चंपा : कुष्ठ रोग, खुजली व चर्म रोग
गेंदा : लिवर में सूजन, पथरी नाशक
चमेली : चर्म रोग, पायरिया व फोड़े-फुंसियों में लाभदायक
news source- patrikanews
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