लोगों के सद्गुणों की प्रशंसा करने से मिलेगी महत्ता

इस दुनिया में महत्ता पाने की लालसा हर व्यक्ति में होती है. इसके लिए वह व्यक्ति अलग अलग तरह के कर्म करता है. जब मकसद महत्ता पाना हो तो ये समझना मुश्किल होता है की कौनसा कर्म करना जरूरी है. वो कर्म सही है या गलत ये समझना वो भूल जाता है.

महत्ता पाने का सबसे आसन तरीका यह है की लोगो की आत्मा की पूजा करना और सद्गुणों की प्रशंसा करना इन बातों को अगर याद रखा जाए तो महत्ता पाने की राह आसन हो जाती है.

सद्गुणों की प्रशंसा
  • हम अपनी संतान, मित्रों, अपने नौकरों के शरीरों को जिस तरह पोषण करते हैं लेकिन उनकी आत्मा का पोषण कम बार ही करते हैं. उन्हें बलवान बनाने बनाने के लिए हम दूध, घी, फल एवं पोष्टिक भोजन कराते हैं किन्तु उनके प्रति दयापूर्ण शब्दों के उपयोग में कंजूसी कर जाते हैं और यही शब्द वर्षों तक प्रातः कालीन नक्षत्रों के संगीत की तरह उनकी मनोस्म्रतियों में गूंजते रहते हैं.

  • एक प्रसिद्ध अभिनेता यह कहा करते थे कि ” दूसरी किसी वस्तु की मुझे इतनी आवश्यकता नहीं है, जितनी कि आत्म पूजा के पोषण की है.

  • गुणग्राहिता और चापलूसी में अंतर होता है. गुणग्राहिता सच्ची होती है और चापलूसी झूठी होती है. गुणग्राहिता का भाव निस्वार्थ होता है वहीँ चापलूसी स्वार्थमय. एक की संसार में सर्वत्र प्रशंसा होती है वहीँ दूसरें की सर्वत्र निंदा.

“जो शत्रु तुम पर आक्रमण करते हैं उनसे मत डरो बल्कि उन मित्रो से डरो जो तुम्हारी चापलूसी करते हैं”

  • यदि हम समय निकालकर कुछ देर अपना चिंतन छोड़कर दूसरें मनुष्य की अच्छी बातों पर विचार करें तो हमें चापलूसी करने की कभी जरूरत ही नही पड़ेगी.

  • जो भी मनुष्य मुझे मिलता है वह किसी न किसी रीती से मुझसे श्रेष्ठ होता है इसलिए मै उससे इसलिए कुछ शिक्षा लेता हूँ.

  • जिस भी मनुष्य से मिले उसकी निष्पक्ष और सच्ची प्रशंसा करें इसमें कंजूसी न करें. लेकिन अति प्रशंसा भी न करें जिससे वो झूठी लगे.

जिस दिन आप ऐसा करना शुरू कर देंगे तब देखिये कि लोगों को आपके शब्द कितने अच्छे लगते हैं. आपको वो अपने ह्रदय में कितना सम्भाल कर रखते हैं. आप जब उनको भूल चुके होंगे उसके वर्षों बाद भी वे उन शब्दों को याद रखेंगे.

लेखक: अधिवक्ता दिनेश श्रीवास्तव 

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