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इसरो (ISRO) की अन्तरिक्ष में प्रमुख उपलब्धियां, जाने …..

भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है,इसरो. जिसका मुख्यालय बेंगालुरू कर्नाटक में है. इसमें लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्य करते जिनका जूनून भारत को अंतरिक्ष में नया मुकाम हासिल कराने में सहायता कर रहा है . हालही में इसरो ने दुनियाभर में एक नया इतिहास रचा है इतिहास भी ऐसा कि अन्‍य विकसित देश भी इसरो की इस सफलता से आश्‍चर्यचकित हैं. आइए जानते है, इसरो की ऐसी ही कुछ और उपलब्धियों के बारे में…….

अंतरिक्ष का सफर उपग्रह आर्यभट्ट के साथ  :

image source : ytimg.com

इसरो ने 19 अप्रैल, 1975 में स्वदेश निर्मित उपग्रह आर्यभट्ट के प्रक्षेपण के साथ अपने अंतरिक्ष सफर की शुरुआत की. जो सोवियत संघ द्वारा शुरू किया गया था.

रोहिणी उपग्रह :

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1980 में रोहिणी उपग्रह पहला भारतीय-निर्मित प्रक्षेपण यान एसएलवी -3 बनाया गया जिसे कक्षा में स्थापित किया गया.

भारत से विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण :

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1999 में इन्सैट-2E इन्सैट-2 क्रम के आखिरी उपग्रह का फ्रांस से सफल प्रक्षेपण. भारतीय दूर संवेदी उपग्रह आई आर एस एस-P4 श्रीहरिकोटा परिक्षण केन्द्र से सफल प्रक्षेपण. पहली बार भारत से विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण : दक्षिण कोरिया के किटसैट-3 और जर्मनी के डी सी आर-टूबसैट का सफल परीक्षण.

इसरो का चंद्रयान : 

image source : dnaindia.com

भारत ने पहला Lunar Exploration program लॉन्च किया, जिसके अंतर्गत इसरो ने चंद्रयान बनाकर इतिहास रच दिया था. 22 अक्टूबर 2008 को पूरी तरह से देश में निर्मित इस मानव रहित अंतरिक्ष यान को चांद पर भेजा गया, इससे पहले ऐसा सिर्फ छह देश ही कर पाए थे.

मंगलयान ने इसरो को दुनिया में चमकाया  : 

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मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश पर 24 सितंबर 2014 को अपने पहले ही प्रयास में सफल रहने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना, तथा भारतीय मंगलयान ने इसरो को दुनिया के नक्शे पर चमका दिया. इस मिशन में सबसे अहम बात यह थी कि भारत ने पूरे अभियान को अमेरिका के मंगल मिशन की तुलना में 10 फीसदी कम कीमत में कर दिखाया.

संचार उपग्रह जीसैट-6 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण :

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27 अगस्त 2015 को स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज (सीयूएस) से लैस भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-डी 6) ने भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में देश के उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-6 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया.

IRNS सिस्टम के सातवें उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण  :

image source : ibnlive.in

28 अप्रैल 2016 को इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम के सातवें उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया. इसके साथ ही भारत को अमेरिका के जीपीएस सिस्टम के समान अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम मिल गया. इससे पहले यह उ​पलब्धि केवल अमेरिका और रूस को ही हासिल थी.

पीएसएलवी सी-34 : 

इसरो
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22 जून 2016 को इसरो ने 2008 में बनाए गए अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए पीएसएलवी सी-34 के माध्यम से रिकॉर्ड 20 उपग्रह एक साथ छोड़े. पीएसएलवी का वजन 1,288 किलोग्राम है. इस सैटेलाइट का उद्देश्य शहरी ग्रामीण, तटीय भूमि और जल वितरण आदि की जानकारी प्राप्त करना था.

जीएसएलवी-एफ 05 की सफल उड़ान :

इसरो
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08 सितंबर 2016 को स्वदेश में विकसित क्रायोजेनिक अपर स्टेज(सीयूएस) का पहली बार प्रयोग करते हुए जीएसएलवी-एफ05 की सफल उड़ान के साथ इनसैट-3डीआर अंतरिक्ष में स्थापित किया.

इसरो ने पूरे विश्व में रचा इतिहास  :

इसरो
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15 फरवरी 2017 को पीएसएलवी-सी-37 के जरिये एक साथ 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक तय समय में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर ‘इसरो’ ने पूरे विश्व में इतिहास रच दिया. इससे पहले यह रिकार्ड रूस के नाम था, जो साल 2014 में 37 सैटेलाइट एक साथ भेजने में कामयाब रहा था.

इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन के अनुसार भारत की अंतरिक्ष योजना भविष्य में मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन भेजने की है. लेकिन इस तरह के अभियान की सफलता सुनिश्‍चित करने के लिए अभी बहुत सारे परीक्षण किये जाने हैं.

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Brajendra Sharma

नमस्ते, मैं एक हिन्दी ब्लॉगर हूँ और मुझे देशी-विदेशी, करियर, से जुड़ी स्टोरीज लिखना अच्छा लगता हैं एवं मुझे ऐसी स्टोरीज लिखना भी पसंद है जो आपको अच्छी लगें. इसलिए आप मुझें comment करके बता सकते हैं.

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