शिक्षक दिवस : पिता चाहते थे पुजारी बनाना पर बने देश के राष्ट्रपति , जाने रोचक तथ्य

ये बात सत्य है कि आप किसी की प्रतिभा को दबाकर या रोककर नहीं रख सकते वो सूरज की किरण के जैसे एक सूक्ष्म दर्दे से भी बंद कमरे को रोशनी कर ही देती है ऐसे ही प्रतिभा थोड़ा अवसर मिलते ही जग जाहिर हो ही जाती है और प्रतिभा किसी मुकाम पर जाकर ठहरती नहीं है, वह उस मुकाम को नई ऊंचाई छूने का रास्ता बनाती है और एक दिन अपनी मंजिल पाकर रहती है। प्रतिभा का संघर्ष लगातार जारी रहता है, जब तक कि उन्हें अपनी मंजिल न मिल जाए.

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ऐसी ही कुछ ख़ासियत थी भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जो महान शिक्षाविद, महान दार्शनिक, महान वक्ता, विचारक एवं भारतीय संस्कृति के ज्ञानी थे और जिनके जन्म दिन यानि 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है तो आइये जानते उनके जीवन से जुड़े ये कुछ रोचक तथ्य !

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  1. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पिता उन्हें पढ़ाना नहीं चाहते थे बल्कि मंदिर में पुजारी बना चाहते थे .
  2. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को मरणोपरांत 1975 में अमेरिकी सरकार द्वारा टेम्‍पलटन पुरस्‍कार दिया गया
  3. इग्‍लैैैैण्‍ड सरकार द्वारा  सर्वपल्ली राधाकृष्णन को ऑडर ऑफ मेरिट का सम्‍मान दिया गया
  4. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पोप जॉन पॉल ने इनको गोल्‍डन स्‍पेर भेट किया.
  5. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्‍मान मे उनके जन्‍म दिवस  5 सितम्‍बर 1962 को शिक्षक दिवस मनाने की घोषणा की गयी
  6. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को शिक्षा और राजनीति में योगदान के लिए 1954 में भारत रत्‍न से सम्‍मानित किया गया.
  7.  डॉ. राधाकृष्णन के नाम में पहले सर्वपल्ली का सम्बोधन उन्हे विरासत में मिला था। राधाकृष्णन के पूर्वज ‘सर्वपल्ली’ नामक गॉव में रहते थे .
  8. “मौत कभी अंत या बाधा नहीं है बल्कि अधिक से अधिक नए कदमो की शुरुआत है।” ऐसे सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने वाले असीम प्रतिभा का धनी सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन लम्बी बीमारी के बाद 17 अप्रैल, 1975 को प्रातःकाल इहलोक लोक छोङकर परलोक सिधार गये।
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Rajdeep Raghuwanshi

नमस्ते , मैं एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूँ और मुझे एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और ह्यूमर पर लिखना पसंद है !

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