सात जन्मो के लिए ही जुडती है इस मंदिर में हुई शादी

मंदिर में शादी

हिन्दू मान्यताओ के अनुसार शादी सात जन्मो बंधन होता है. पर ये कहाँ किसको पता होता है कि शादी कब तक चलने वाली है. आज के दौर में जहाँ तलाक आम बात हो गयी है वहां शादी को सात जन्मो के लिए सोचना भी अजीब है.

लेकिन आज जहाँ शादी का कोई भरोसा नहीं है वहां एक ऐसे मंदिर के बारे में आपको बतायेंगे जहाँ शादी करने वालो सम्बन्ध सात जन्मो तक ही चलता है.

****यह भी पढ़ें****

ये प्रिंस जुए में हार बैठा 22 अरब रूपये और अपनी 5 बीवियों , जाने इस खबर का सच

ये है 10 लाख का टीपू गधा , ख़ासियत जानकर दंग रह जाओगे

*****

महाराष्ट्र के दहिसर में भाटला देवी का मंदिर है जहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि यहाँ पर होने वाली शादियाँ 7 जन्मो के लिए ही होती हैं. मतलब आगे के जन्मों में भी वो पति-पत्नी ही बनते हैं. यहां के भक्तों का मानना है कि जिन लोगों की शादी इस मंदिर में होती है, उनकी शादी में कभी भी दरार नहीं आती और ना ही दोनों के बीच कभी खटपट होती है.

क्या है मंदिर का इतिहास

इस मंदिर के पीछे की कहानी कहती है कि जब पुर्तगाल से आए लोग वसई क्षेत्र में हिन्दू देवी-देवताओं के मंदिरों को बर्बाद कर रहे थे तब चिमाजी अप्पा वहां से देवी की मूर्ति लेकर दहिसर आ गए। उस समय यह इलाका घने पेड़ों से घिरा हुआ था। यहां पीपल के एक पेड़ के नीचे उन्होंने देवी की मूर्ति छिपा दी।

सबसे पहले भाटों ने ही इस मूर्ति के दर्शन किए इसलिए इस मूर्ति को भाटला देवी कहा जाता है। भाटों ने यहां मंदिर बनवाया जो बहुत छोटा सा था। लेकिन जब तत्कालीन इंडस्ट्रीज कमिश्नर, जो बहुत धार्मिक प्रवृत्ति के थे, रिटायर हुए तब उन्होंने इस मंदिर को एक विशाल स्वरूप दिया और स्वयं ही इसकी देखरेख करने लगे।

यह मंदिर 40 हजार वर्ग फुट में फैला हुआ है, जिसमें भाटला देवी के अलावा पवनपुत्र, श्री राधाकृष्ण, गणेश जी की मूर्तियां मौजूद हैं। भक्तों का मानना है कि जो भी व्यक्ति यहां सच्चे और साफ मन से पूजा करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यहां शादियां भी करवाई जाती हैं, जिनके पीछे की यह धारणा है कि इस मंदिर में शादी कभी नहीं टूटतीं और ना ही उनमें दरार आती है।

loading...
Skip to toolbar