हो सकती है क्या , नाक भी इतनी एडवांस

कहावत है कि इंसान की शान उसकी नाक है पर इंसान अपनी नाक का इस्तेमाल सांस लेने और गंध की पहचान करने के लिये करते हैं. भावनात्मक स्तर पर कभी-कभी इसके चलते तनातनी भी हो जाती है. लेकिन जानवरों की नाक इंसानों के मुकाबले अधिक एडवांस हैं. हो सकती है क्या , नाक भी इतनी एडवांस !

हो सकती है क्या , नाक भी इतनी एडवांस ! डालते हैं एक नजर …..

चमकदार नाक

बंदरों की प्राचीनतम प्रजातियों में शुमार मैंडरिल बंदरों की नाक इनके शरीर का सबसे उजला हिस्सा होती है. नर बंदरों की नाक अन्य बंदरों के मुकाबले अधिक चमकदार होती है. जब ये बंदर गुस्से में पागल हो जाते हैं तो इनकी नाक के नीले हिस्से की चमक और भी बढ़ जाती है. नाक का लाल रंग शरीर में खून के प्रवाह को दर्शाता है

ऑल-राउंडर नाक

हाथी अपनी सूंड का इस्तेमाल गंध की पहचान करने के लिये, दुश्मन को पटखनी देने के लिये और स्नॉर्कल के लिये करते हैं. स्नॉर्कल एक तरह का उपकरण होता है जिसका इस्तेमाल इंसान पानी में तैरते वक्त सांस लेने के लिये करते हैं. लेकिन जानवर अपनी नाक के जरिये ही सांस लेते हैं. हाथी की सूंड इसकी नाक और होंठ का मिश्रण होता है.

हो सकती है क्या , नाक भी इतनी एडवांस  , जाने  …

दूर भगाती नाक

उभरी हुई नाक के चलते ही इन जानवरों का नाम एलिफेंट सील पड़ा. नाक का उभार आपको हाथी की सूंड याद दिला सकता है. मेटिंग (सहवास) सीजन में नर एलिफेंट अपने मुंह को रक्त और हवा के साथ ऊपर उठाता है और अपने प्रतिद्वंद्वियों को दूर करने के लिए जोर से शोर करते हैं. नर और मादा दोनों ही अपनी नाक से नमी को अवशोषित करते हैं.

डंक मारने वाली नाक

समुद्री जीव उरकिन को ट्रिगरफिश का पसंदीदा भोजन माना जाता है. उरकिन को हासिल करने के लिये ये मछलियां अपनी लंबी नाक का इस्तेमाल करती हैं. लजीज उरकिन का शिकार करने के लिये ये मछली (तस्वीर में पिकासो मछली नजर आ रही है) पानी को जोर से फेंकती हैं और मुंह से उरकिन पर डंक मारती है.

90 सेंटीमीटर लंबी नाक

विशाल एंटईटर के शरीर में नाक की तरह नजर आने वाला ये हिस्सा असल में थूथन है. असली नाक इसकी नोंक पर हैं. इसका इस्तेमाल यह एंटईटर सूंघने और भोजन की खोज के लिये करते हैं. जब इसे कोई लजीज भोजन नजर आता है यह अपनी 90 सेंटीमीटर लंबी जीभ निकाल कर उसे तपाक से पकड़ लेते हैं.

प्लग-सॉकेट जैसी नाक

प्लग-सॉकेट की तरह दिखने वाली सुअर की नाक बदसूरत लग सकती है लेकिन यह बेहद ही संवेदनशील हिस्सा होता है. यह मिट्टी में 50 सेंमी गहरी चीजों को भी महसूस कर सकती हैं. सूंघने की क्षमता कुत्तों के मुकाबले सुअरों में अधिक होती है और इसलिये इन्हें कुकुरमुत्तों की खोज के लिये बेहतरीन माना जाता है.

कमजोर नाक

कुत्तों की पग प्रजाति में नाक का आकार चौकोर होता है. माना जाता है कि सदियों पहले चीन के राजा के पास पग को पालने के विशेषाधिकार थे. बाद में ये पेंटिंग में महिलाओं के साथ भी नजर आये. लोगों ने इन कुत्तों को मनोरंजन के लिये पाला लेकिन ये कुत्ते अपने कमजोर श्वसन तंत्र से ग्रस्त हैं. इनके श्वसन अंग अत्यधिक संकुचित हैं जो इनकी बीमारी का कारण हैं.

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Rajdeep Raghuwanshi

नमस्ते , मैं एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूँ और मुझे एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और ह्यूमर पर लिखना पसंद है !

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