राफिया कासीम बेग कौन हैं, क्यूँ है सोशल नेटवर्किंग साईट पर सुर्ख़ियों में ……

अब धीरे धीरे पाकिस्तान भी लाइन पर आता दिख रहा है . एक तरह जहाँ पाकिस्तान में महिलाओं  का बिना बुर्का पहनकर घर से  बाहर निकल तक माना है  वहीँ दूसरी तरह महिलाओं की डिफेन्स में भर्ती बड़ा ही आश्चर्यजन लगता है. खैर जो भी  हो कम से कम पाकिस्तान के तेबर महिलाओं के  प्रति ठंडे पड़ते तो नज़र आ रहे हैं. हाल ही में राफिया कासीम बेग पाकिस्तान की पहली महिला बम डिस्पोजल अफसर बन गई हैं. कासीम बेग सात साल पहले पाकिस्तान के खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत की पुलिस में कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुई थीं.अब वह बम निष्क्रिय करने की ट्रेनिंग हासिल कर पाकिस्तान की पहली महिला बम डिस्पोजल ऑफिसर बन गई हैं.

राफिया कासीम बेग ने एक ऐसे क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है जहां उनसे पहले कोई पाकिस्तानी महिला नहीं पहुंच पाई है. 29 साल की राफिया कासीम बेग ने एक चैनल को बताया कि जब वह पुलिस में भर्ती हुई थीं तो खैबर पख्तून ख्वाह में आए दिन हमले हो रहे थे. उनके कांस्टेबल बनने के कुछ दिन बाद ही एक सेशन अदालत के बाहर धमाका हुआ था. उन्होंने तभी फैसला कर लिया था कि वह बम डिस्पोजल यूनिट का हिस्सा बनेंगी.

2010 में आतंकियों से एक डॉक्टर को छुड़ाने के अभियान में 40 पुरुष अधिकारीयों में राफिया कासीम बेग अकेली थीं 

राष्ट्रीय संबंधों में एमए करने वाली राफिया कासीम बेग ने कई पुलिस अभियानों में हिस्सा लिया है. पेशावर का इलाका मुतनी कभी आतंकवादियों के कब्जे में था. राबिया सेना और अर्धसैनिक बल एफसी के अभियानों का हिस्सा बनीं और यह इलाका आतंकवादियों से मुक्त करा लिया गया. 2010 में अगवा पेशावर के एक डॉक्टर इंतिखाब आलम को छुड़ाने के अभियान में शामिल राबिया अकेली महिला थीं. वह कहती हैं, “डॉ. इंतिखाब आलम को छुड़ाने के लिए तीन दिन तक अभियान चला. इसमें 40 पुरुष अधिकारियों के साथ मैं अकेली महिला थी.”

अभी तक 2 बार कर चुकी बम डिस्पोज

राफिया कासीम बेग

राफिया बताती हैं कि वह दो बार देसी बमों को निष्क्रिय कर चुकी हैं. उन्हें ट्रेनिंग में यह सिखाया गया है कि बेहद कम समय में कैसे बड़ा नुकसान होने से रोका जाए. राफिया कहती हैं कि वह एशिया की पहली महिला हैं जो बम डिस्पोजल यूनिट का हिस्सा बनीं.  उन्हें खैबर पख्तून ख्वाह पुलिस का हिस्सा बनने पर गर्व है, जिसने बहुत ही कम संसाधनों के साथ आतंकवादियों का भरपूर तरीके से मुकाबला किया है.राफिया के अनूसार खैबर पख्तून ख्वाह और पूरे पाकिस्तान में सुरक्षा हालात बेहतर हुए हैं, लेकिन अब भी आतंकवादी खतरा बना हुआ है. वह अपने देश के लिए किसी भी तरह की कुरबानी के लिए तैयार हैं.

मलाल के बाद अब राफिया बन रही है पाकिस्तानी लड़कियों के लिए प्रेरणा 

राफिया कासीम बेग

राफिया कई लड़कियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं. अब 11 लड़कियां और उनकी ही तरह बम निष्क्रिय करने की ट्रेनिंग की हासिल कर रही हैं.

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Rajdeep Raghuwanshi

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