siteswebdirectory.comजाने क्या है करवाचौथ में रानी वीरवती की कहानी - Fadoo Post

जाने क्या है करवा चौथ में रानी वीरवती की कहानी

पति की लम्बी आयु बनाये रखने के लिए महिलाये व्रत रखती हैं इस व्रत को करवाचौथ कहते हैं. इन्हें शादीशुदा महिलाएं या वे जिनकी शादी होने वाली है वे रखती हैं. यह कार्तिक माह के चौथे दिन होता है. यह व्रत सुबह सूरज उगने से लेकर रात को चंद्रमा निकलने तक होता है. वैसे तो सारे देश में इस व्रत को हर्षोल्लास से मनाया जाता है लेकिन उत्तर भारत में इसका एक ख़ास ही अनुभव देखने को मिलता है.

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हर व्रत को लेकर कोई न कोई कथा होती होती है इस व्रत के पीछे भी कोई एक नहीं बल्कि कई कथाये प्रचलित हैं. इन कथाओं में एक कथा रानी वीरवती की भी है जो अपने पति को बचाने के लिए व्रत का पालन करती है.

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इस कथा के अनुसार वीरवती नाम की एक राजकुमारी रहती है जिसकी शादी एक राजा से कर दी जाती है. शादी के बाद वह चौथ का व्रत करने अपने मायके आती है राजकुमारी की कोमलता उस व्रत की कठोरता को सहन नहीं कर पाती और वह कमजोरी से बेहोश हो जाती है. उसके सात भाई जो उससे बहुत स्नेह रखते थे चालाकी से झूठा चाँद दिखाकर उसका व्रत तुडवा देते हैं और अगले ही पल उसके पति की मृत्यु का समाचार उसके पास आ जाता है.

पति के घर की और लौटते हुए उसे माता पार्वती और शिव मिलते हैं. माता उसे बताती है कई झूठा चाँद देखकर व्रत तोड़ने से उसके पति की मौत हुई है वीरवती माता से क्षमा मांगती है तब माता उसे वरदान स्वरूप उसके पति को जीवित कर देती है लेकिन वह स्वस्थ नहीं होता है. वीरवती जब महल पहुँचती है जो राजा बेहोश होता है और उसके शरीर में कई सुइयां चुभी होती हैं. रानी राजा की सेवा में लग जाती है और सेवा करते हुए रोज एक सुई निकालती है.

ऐसे ही एक साल बाद फिर करवाचौथ आता है इस दिन राजा की आखिरी सुई बची होती है. रानी अपने पसंद का करवा लेने बाजार बाजार गयी होती है वहीँ पीछे से दासी राजा की आखिरी सुई निकल देती है. सामने रानी की जगह दासी को देखकर वह उसे ही रानी समझने लगता है और जब रानी वापिस आती है तो राजा उसे दासी बना देता है फिर भी वीरवती अपने व्रत को नहीं छोडती है.

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राजा ठीक होने के बाद एक बार दूसरें राज्य को जाने के लिए निकलता है तो दासी बनी रानी से भी पूछ लेता है कि कुछ लाना है तो वह राजा से एक जैसी दिखने वाली दो गुड़ियाँ मंगा लेती है. गुड़ियाँ आने के बाद वह एक गाना गाती रहती है, रोली की गोली हो गई …..गोली की रोली हो गई. जिसका अर्थ था दासी बन गयी रानी… रानी बन गयी दासी. एक दिन राजा ने वीरवती से उसका मतलब पूछा तो रानी ने अपनी सारी कहानी बता दी. राजा को पछतावा हुआ और उसने वीरवती को फिर से रानी बना दिया और उसे उसका पुराना सम्मान वापिस मिल गया.

इस तरह रानी वीरवती ने माँ पार्वती की कृपा और करवाचौथ व्रत के फल से अपने पति और सम्मान को वापिस पा लिया.

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