लन्दन में बेचा वड़ापाव और करोड़ों की कमाई

बड़ापाव मुंबई के लिए एक टाइम के खाने की तरह है. मुंबई में कई लोग बड़ापाव खाकर अपना पेट भरते हैं. लेकिन जब किस्मत और हुनर किसी के साथ हो तो छोटी से छोटी चीज़ भी बड़े मुनाफे की साबित हो सकती है.

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2009 में जब विश्व आर्थिक मंदी का शिकार हुआ तब लन्दन में मुंबई के दो लडको की नौकरी भी चली गयी और उनके पास बड़ापाव खाने तक के पैसे नहीं बचे थे. मुंबई के संजय सोहानी लन्दन के फाइव स्टार होटल में फ़ूड एंड बेवरेज मेनेजर थे मंदी के दौर में उनकी नौकरी भी चली गयी थी.

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source: foodhub

संजय ने अपने दोस्त सुबोध को अपनी हालत के बारे में बताया और बातचीत में ही उन्हें लन्दन की सड़कों पर बड़ापाव बेचने का आईडिया आया. बड़ी मुश्किल से एक आइसक्रीम कैफ़े में उन्हें जगह मिली जहाँ से उन्होंने बड़ापाव बेचना शुरू किया.लेकिन खास सफलता न मिलने पर उन्होंने नया सोचा और फ्री में लोगों को टेस्ट करने का सोचा और इंडियन बर्गर कहकर इसे बेचना शुरू किया.

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जैसे जैसे वड़ापाव की बिक्री बड़ी उन्हें बड़ी जगह की जरूरत पड़ने लगी और फिर कैफ़े के पास ही उन्होंने दूसरा स्टाल खोल लिया. फिर पंजाबी रेस्टोरेंट के साथ बिज़नस का प्रोपसल स्वीकार करके श्रीकृष्ण वड़ापाव अब एक रेस्तरां में तब्दील हो गया.

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इस तरह लन्दन के लोगों को बड़ापाव पसंद आने लगा और इन दोनों का बिज़नस बढ़ने लगा. आज के समय में संजय और सुबोध के रेस्टोरेंट की 3 ब्रान्चेस हैं जिसमे 35 लोग काम करते हैं उन्होंने अपने मेनू में वड़ापाव के अलावा 65 अलग-अलग स्ट्रीट फ़ूड भी जोड़े हैं. और उनका सालाना टर्नओवर 4 करोड़ से भी ऊपर का है.

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