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भारत के ऐसे सात शिक्षक जिन्होंने पढ़ाने के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया

शिष्य के मन में सीखने की इच्छा को जो जागृत कर पाते हैं, उन्हें ही शिक्षक कहते हैं. हमारे समाज के निर्माण में शिक्षकों की एक अहम भूमिका होती है, क्योंकि ये समाज उन्हीं बच्चों से बनता है जिनकी प्राथमिक शिक्षा का जिम्मा एक शिक्षक पर होता है. आज हम आपको बताने वाले हैं, भारत के ऐसे सात शिक्षक जिन्होंने पढ़ाने के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया.

आदित्‍य कुमार :

आदित्‍य कुमार साइकिल से बीते लगभग 20 वर्षो से गांव-गांव में घूमकर वंचित बच्चों को पढ़ाते और उनके माता-पिता को शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हैं. वे कहते हैं, ‘साइकिल मेरा घर और स्कूल है. अब तक मैं करीब पांच हजार गरीब, अनाथ व जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दे चुका हूं.

दिनेश कुमार :

उज्जैन के लसुड़िया चुवड़ गांव में चार साल तक एक किराए के कमरे में बच्चों को पढ़ाने वाले दिनेश कुमार जैन छात्रों की पढ़ाई कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए. दिनेश कुमार जिस सरकारी स्कूल में पढ़ाते थे, उसकी छत टूटी थी, जिसकी मरम्मत के लिए दिनेश कुमार ने 12 बार एजुकेशन डिपार्टमेंट को खत लिखा. बिल्डिंग की खस्ता हालत को देखते हुए स्कूल सील कर दिया गया. वहां पढ़ने वाले सभी छात्रों की पढ़ाई खतरे में आ गई. दिनेश के तबादले तक की नौबत आ गई थी लेकिन तबादला रद्द हो गया और अब दिनेश एक किराए के घर में बच्चों को पढ़ाते हैं.

फादर जूलियन :

कंप्‍यूटर से जुड़ी शिक्षा देने के लिए ये शिक्षक उसके बस में जितना है वो सब करता है. कर्नाटक के चित्रादुर्गा जिले में डॉन बॉस्‍को इंस्‍टीट्यूट चलाने वाले  जूलियन ने बस में स्‍कूल चलाना शुरू किया है, इनके स्‍कूल को यहां ‘स्‍कूल ऑन व्‍हील्‍स’ कहा जाता है. वे साल 2012 से इस बस में 20-20 बच्‍चों के बैच को कम्‍प्‍यूटर की फ्री ट्रेनिंग देते हैं. भारत के ऐसे सात शिक्षक

अन्नपूर्णा मोहन :

तमिलनाडु में एक ऐसी शिक्ष‍िका जिन्होंने छात्रों को वैश्व‍िक स्तर की सुविधा देने के लिए अपने गहने तक बेच दिए. तमिलनाडू के सरकारी स्कूल पंचायत यूनियन प्राइमरी स्कूल कठमांडू में क्लास 3 के बच्चों को पढ़ाती हैं अन्नपूर्णा मोहन.

गगनदीप सिंह :

राजस्‍थान के जैसलमेर में स्‍पेशल नीड वाले बच्‍चों को पढ़ाने वाले गगनदीप एजुकेशनल प्रोग्राम्‍स चलाते हैं. गगन ने नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ विजुअली हैंडीकैप्‍ड से ट्रेनिंग ली है. भारत के ऐसे सात शिक्षक

आनंद कुमार :

आनंद कुमार बिहार में सुपर 30 कोचिंग चलाते हैं. आनंद कुमार गरीब बच्चों  को पढ़ाते हैं और उनसे फीस तक नहीं लेते. आनंद कुमार ऐसा 15 सालों से अधिक समय से कर रहे हैं. आनंद ना केवल इन बच्चों को पढ़ाते हैं बल्कि वे इन्हें अपने घर में भी हैं और उनकी मां बच्चों लिए भोजन बनाती हैं.

राजेश शर्मा :

दिल्‍ली में मेटो ब्रिज के नीचे गरीब बच्‍चों को पढ़ाने वाले राजेश शर्मा एक जनरल स्‍टोर चलाते हैं. वो रोज दो घंटे बच्‍चों को फ्री में पढ़ाते हैं. यही नहीं वे बच्‍चों को किताबें आदि भी देते हैं. उनके पास बच्‍चों को पढ़ाने के लिए कोई जगह नहीं है इसलिए वो बच्‍चों को ब्रिज के नीचें पढ़ाते हैं.

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Brajendra Sharma

नमस्ते, मैं एक हिन्दी ब्लॉगर हूँ और मुझे देशी-विदेशी, करियर, से जुड़ी स्टोरीज लिखना अच्छा लगता हैं एवं मुझे ऐसी स्टोरीज लिखना भी पसंद है जो आपको अच्छी लगें. इसलिए आप मुझें comment करके बता सकते हैं.

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