गाँव में जब नवाज़ुद्दीन लगा कर निकलते थे गोरे होने की क्रीम

बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग से सबको चौंका कर उभरने वाले एक्टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपनी फिल्म बाबूमोशाय बंदूकबाज की सक्सेस से खुश हैं. इस फिल्म को लेकर काफी विवाद चला था.

नवाज का कलर थोडा सांवला है इसके चलते उन्हें कई बार कमेंट्स सुनने को मिल जाते हैं. हाल ही में उनकी एक फिल्म की कास्टिंग डायरेक्टर ने भी ऐसा रेसिस्ट कमेंट किया था जिसे नवाज़ ने ट्विटर पर करारा जवाब दिया है.

 

नवाज़ बचपन में अपने कलर को लेकर काफी असहज महसूस करते थे. एक बातचीत में नवाज़ुद्दीन ने कहा वो जब छोटे थे, तो अपने सांवले रंग को लेकर बड़ा इन्फीरियर फील करते थे.

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उन्होंने बताया की गाँव में छोटी छोटी दुकाने हुआ करती थी जिन पर एक रूपए में फेयर एंड लवली मिला करती थी. गोरे होने की चाहत में वो क्रीम लाते और लगा लेते थे उससे चेहरा सफ़ेद हो जाता था, उसमे कुछ पाउडर जैसा होता था जिससे वो चेहरे पर जैम जम जाता था. फिर जब वे बहार निकलते तो लोग मजाक उड़ाते थे कि गन्दी क्रीम लगाकर आया है.

इस तरह के कई किस्से नवाज़ की आने वाली किताब एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जर्नी ऑफ अ ड्रामा किंग में पढने को मिल सकेंगी इस किताब पर अभी काम चल रहा है. नवाज़ का कहना    है कि लोग अब भी यही मानते है कि सांवले रंग   वाले कमतर और गोरे रंग वाले सुन्दर होते हैं.

नवाज़ुद्दीन की आने वाली फिल्मे चंदामामा दूर के और शू बाईट है. जिन्हें आने में अभी काफी वक़्त है.

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