आखिर क्यों पहनते है वकील काला कोट

आपने लगभग सभी वकीलों को काला कोट पहनते देखा होगा लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि वकील काला कोट ही क्यों पहनते है? अगर अपने यह सोचा भी होगा तो शायद आपको इसका जबाब पता नहीं होगा तो चलिए जानते है इसका जबाब

काले कोट में वकील

वकालत की शुरुआत सन 1327 ईस्वी में एडवर्ड तृतीय द्वारा की गयी थी। उसी समय जजों और वकीलों की वेशभूषा तैयार की गयी थी तथा वकीलों को चार श्रेणियों स्टूडेंट ,प्लीडर , बेंचर और वैरिस्टर में  बांटा गया था।

उस समय वकील भूरे रंग का गाउन और लाल कपड़े पहनते थे। सन 1607 ईसवी में वकीलों की वेशभूषा में परिवर्तन आया और सन 1637 यह प्रस्ताव रखा गया की परिषद् को आम लोगो से अलग पोशाक पहनना पड़ेगी।

सन 1964में रानी मैरी कि चेचक से मौत हो जाने पर राजा विलियंस ने सभी न्यायधीशों और वकीलों को सार्वजानिक शोक हेतु आमंत्रित किया तथा उन्हें काले लिवाज़ में आने को कहा। उसके बाद सभी न्यायधीशों और वकीलों की पोशाक काले रंग की ही बन गयी।

इसके अलावा  एक्ट 1961 के तहत कोट के साथ सफ़ेद टाई बैंड भी अनिवार्य कर दिया गया इस अधिनियम को पारित करने वाली समिति का मानना है कि काला ड्रेस वकीलों में अनुशासन लाता है और उन्हें अन्य लोगो से अलग भी दिखाता है।

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