siteswebdirectory.comअमेरिका के पायलट अब क्यूँ नहीं मरेंगे , जाने - Fadoo Post

अमेरिका के पायलट अब क्यूँ नहीं मरेंगे , जाने

युद्ध एवं हमले के दौरान कई महेंगे लड़ाकू विमान नष्ट हो जाते है तथा कई पायलट मारे भी जाते है. जिनसे जान माल दोनों का भारी नुकसान होता है. चूँकि पायलट एक इंसान होता है जिसकी जान की कीमत की तुलना एक मशीन की कीमत से नहीं की जा सकती. इसीलिए अब दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका अब ऐसे छोटे और सस्ते मानवरहित लड़ाकू विमान बना रहा है. जो तकनिकी रूप से बहुत अधिक सक्षम तथा आकार में छोटे हों. इसलिए जाने , अमेरिका के पायलट अब क्यूँ नहीं मरेंगे , जाने .

अमेरिका के पायलट अब क्यूँ नहीं मरेंगे , जाने

कैसे है ये विमान
Image Source : cdn1.img.sputniknews.com

ये विमान ऑटोपायलट होंगे जिन्हें इनके अन्दर इनस्टॉल कृत्रिम बुद्धिमता वाले कंप्यूटर पायलट द्वारा चलाया जायेगा जिनमे छोटे और शक्तिशाली टर्बोफेन इंजन लगे होंगे. इनके आलावा ये एक साथ कई छोटे और आधुनिक हथियार ले जानें में सक्षम होंगे. ये आकर में लगभग 10 वर्गमीटर के होंगे तथा वजन में भी हल्के होंगे साथ ही अन्य लड़ाकू विमानों और ड्रोन से बहुत सस्ते होंगे जहाँ एक 5वी पीढ़ी के लड़ाकू विमान और ड्रोन की कीमत लगभग $130 मिलियन होती है वहीँ इन छोटे फाइटर जेट्स की कीमत $9 से $20 लाख तक होगी. ये फाइटर्स अत्याधुनिक ड्रोन और लड़ाकू विमानों का सयुंक्त रूप होंगे.

क्यों है इनकी आवश्यकता,
Image Source : dailytechinfo.org

कुछ सैन्य वैज्ञानिकों का तर्क है कि लड़ाकू विमानों के कॉकपिट में इंसान होने के कई कारण है जिनमें उनकी तेजी से निर्णय लेने की क्षमता, उनका कौशल और अप्रत्याशित खतरों से निपटने की क्षमता शामिल है. परन्तु विमान के कॉकपिट में मानव पायलट को कई बाधाओं का सामना पड़ता है जैसे ऊपरी आकाश में ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक G-फ़ोर्स, और इंजेक्ट होने के पश्चात् दुश्मनों द्वारा बंदी बनाया जाना. इसके अतरिक्त अब तक ऐसा कोई भी लड़ाकू विमान तैयार नही किया गया है जिसमें इमरजेंसी ऑक्सीजन सिस्टम हो जो पायलट को ऊपरी आसमान में ऑक्सीजन उपलब्ध करा सके.

क्या लाभ होगा,
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इनके निर्माण से अमेरिकी सेना को युद्ध क स्थिति में पायलट्स पर निर्भरता कम होगी तथा छोटे और राडार भेदी होने के कारण ये भारी तबाही मचा सकते है. इसके अलावा इन्हें निशाना बनाना कठिन होगा और नष्ट होने पर नुकसान कम होगा.

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