siteswebdirectory.comनवरात्री में जाने किस दिन होती है किसकी पूजा - Fadoo Post

नवरात्री में जाने किस दिन होती है किसकी पूजा

देश भर में चारों और नवरात्र की धूम मची हुई है जहाँ देखों वहां देवी की प्रतिमा विराजमान है. धर्मप्रेमी बंधुओं का प्रमुख त्यौहार नवरात्री साल में दो बार मनाया जाता है. लेकिन हिन्दू पंचांग के अनुसार यह वर्ष में 4 बार मनाया जाता है. आषाढ़ और माघ माह में आने वाले नवरात्रों को गुप्त नवरात्र कहा जाता है. बाकि दो नवरात्र अधिक लोकप्रिय है और सबसे अधिक लोकप्रिय है दशहरे से ठीक पहले मनायी जाने वाली अश्विन माह की नवरात्र.

नवरात्रों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इन रूपों की अपनी अपनी विशेषता होती है. जिन्हें पूज कर भक्जन भक्ति भावों में नौ दिनों को मनाते हैं. 21 सितम्बर से शुरू हुए इस त्यौहार का अपना महत्व है.

प्रथम दिवस– नवरात्रों के प्रथम दिवस देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है. हिमालय की पुत्री होने की वजह से इनका यह नाम है. इस दिन योगी अपनी साधना का आरम्भ करते हैं.

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द्वितीय दिवस– इस पर्व की दूसरें दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. ब्रह्म का अर्थ है तप और चारिणी का आचरण अर्थात इस दिन योगी मन को माँ के चरणों में लगाते हैं और तप साधना करते हैं.

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तृतीय दिवस– तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की अर्चना की जाती है. इस दिन की पूजा का काफी महत्व होता है. इस दिन योगी अपने मन को मणिपुर चक्र में धारण करते हैं.

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चतुर्थ दिवस– नवरात्र का चौथा दिन कुष्मांडा देवी का होता है. इस दिन योगी का मन अदाह्त चक्र में प्रवेश करता है. इस दिन की पूजा पुर्णतः पवित्र और अचंचल मन से करनी होती है.

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पंचम दिवस– पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है. यह माता मोक्ष के द्वार खोलती है तथा अपने भक्तों का कल्याण करती हैं.

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षष्ठम दिवस– नवरात्री का छठवां दिन माँ कात्यायनी का होता है. इस दिन की पूजा एक अद्भुत शक्ति का संचार करती है. यह बृजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं.

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सप्तम दिवस– नवरात्र का यह दिन बड़ा खास होता है. इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है. इनका रूप देखने में अत्यंत भयानक है लेकिन ये सदैव शुभ फल देने वाली हैं. इसलिए इनका एक नाम शुभंकारी भी है. इस दिन योगी के लिए संसार की समस्त सिद्धियों के मार्ग खुलने लगते हैं.

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अष्ठम दिवस– नवरात्र का आठवां दिन महागौरी का होता है. इनकी पूजा भक्तों के लिए कल्याणकारी होती है. इनकी पूजा से सम्भव कार्य भी सम्भव हो जाते हैं.

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नवमी– नवरात्रों का आखिरी दिवस नवमी होता है. इस दिन माँ के नवे रूप सिद्धिदात्री की पूजा होती है. इनकी उपासना करने से योगी साड़ी सिद्धियों को प्राप्त कर सकता है.

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नवरात्रों में आखिरी के तीन दिवसों का अपना ही एक महत्व होता है. इन दिनों में सभी जगह माता की विशेष पूजा और डांडिया रास किया जाता है.

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